बड़े बुजुर्ग कहते थे कि दूसरों के माल पर निगाह रखना और मुफ्त की खाना दोनों ही ठीक नहीं है क्योंकि एक से नीयत बिगड़ती और दूसरी से नकारापन बढ़ता है। लेकिन इसे क्या कहें कि आज ज्यादातर मामलों में हमें इस व्यवस्था पर चलने की सीख देेने वाले हमारे कुछ जनप्रतिनिधि ही मुफ्त का खाने के आदतें डाल रहे हैं और बड़े जोर शोर से समारोह में ऐसी घोषणाएं की जाती है जबकि सब जानते हैं कि अच्छी सुविधाएं, बढ़िया सड़कें, बिजली पानी की नियमित आपूर्ति, टैक्सों में कमी करके तभी मिल सकती है जब हम जिस चीज का उपयोग कर रहे हैं उसे खरीदकर उसके वाजिब दाम जरूर चुकाएं लेकिन यहां तो जब भी किसी प्रकार के चुनाव का मौसम आता है हमारे नेता राजनीतिक र्पािर्टंया कहीं आटा चावल दाल तो कहीं बिजली पानी मुफ्त देने के साथ ही छात्रों को लैपटाप, साईकिल या बेरोजगारी भत्ता देने की बात करते हें। मैं यह तो नहीं कहता कि हमारे जनप्रतिनिधियों को जनसमस्याओं का समाधान नहीं करना चाहिए लेकिन यह जरूर कहता हॅूं कि मुफत की बजाय महंगाई कम करके सभी को हर चीज सही दाम में उपलब्ध हो तो जो खुशहाली हमसें दूर भाग रही है वो पास आ सकती है। दिल्ली सरकार कुछ चीजे मुफत उपलब्ध करा रही है। 2022 में जिन राज्यों में चुनाव होने हैं कुछ नेता वहां भी बहुत कुछ फ्री देने की घोषणा कर रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर यह आएंगी कहां से । अपने खर्चे प्रतिनिधि, सरकारी हुक्मरान कम करने को तैयार नहीं है। सीधा सा लगता है कि टैक्स बढ़ाए जाएंगे। यह कहां का वाजिब है कि एक का आर्थिक मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न किया जाए और दूसरे को मुफ्त खाने की आदत डाली जाए।
केंद्रीय ऊर्जा एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने गत दिनों हरियाणा के फरीदाबाद में दउद्योगपतियों को भरोसा दिलाया है कि औद्योगिक क्षेत्र में विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम, सीवर प्रणाली विकसित करने संबंधी जो भी बाधाएं थी, वो दूर हो गई हैं। अब विकास तेजी से होगा। इस मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री एक होटल में आयोजित फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की 68वीं वार्षिक आम सभा व अवार्ड वितरण समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। केंद्रीय राज्य मंत्री ने परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा, विधायक नरेंद्र गुप्ता, मंडलायुक्त संजय जून, जिला उपायुक्त जितेंद्र यादव, लखानी अरमान ग्रुप के चेयरमैन केसी लखानी, संस्था के प्रधान बीआर भाटिया, एफसीसीआइ के प्रधान एचके बत्रा संग दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। केंद्रीय राज्य मंत्री ने यहां अपने संबोधन में कहा कि अगर हमें अच्छी सड़कें, साफ पानी और भरपूर बिजली चाहिए तो उसके लिए भुगतान करना पड़ेगा। पूर्व की सरकारों ने मुफ्त में सुविधाएं देने के नाम पर सिस्टम को बिगाड़ दिया है। पिछले सात-आठ सालों में शहर में बिजली आपूर्ति के क्या हालात थे, उद्यमियों से बेहतर कौन जान सकता है। बिजली निगम घाटे में चल रहे थे, मगर मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रयासों से न केवल बिजली निगम घाटे से उबरकर लाभ में आए हैं, बल्कि प्रदेश के अधिकतम गांवों में 24 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है, जहां कभी 8 घंटे बिजली आती थी। उन्होंने कहा कि देश-प्रदेश मे सत्ता का परिवर्तन हुआ, तो शासन-प्रशासन की व्यवस्था भी बदली है और इसका अहसास सभी को है। प्रदेश के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा व विधायक नरेंद्र गुप्ता ने पेयजल किल्लत दूर करने के लिए व सड़कों की बदहाली दूर करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। गुप्ता ने कहा कि दीपावली से पहले शहर की सभी सड़कों की मरम्मत कर दी जाएगी। अतिथियों ने गुलाटी स्टील के प्रधान सुनील गुलाटी को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया। सुनील गुलाटी ने अपने भाई उद्यमी संजय गुलाटी, धर्मपत्नी मीनू, पुत्र नितिन व बच्चों निताशा, अनायशा व रेहान संग यह सम्मान हासिल किया। एफआए प्रधान बीआर भाटिया ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए उनको उद्योगों के समक्ष आने वाली समस्याओं के बारे में बताया। समारोह को केसी लखानी ने भी संबोधित करते हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन एफआइए के महासचिव जसमीत सिंह ने किया। अतिथियों का स्वागत कोषाध्यक्ष एससी भाटिया, उद्योगपति नरेंद्र अग्रवाल, जेपी मल्होत्रा, एचएल भूटानी, प्रदीप मोहंती, शम्मी कपूर, एसएस बांगा, वीके मलिक, विजय जिदल, रमणीक प्रभाकर, जीएस त्यागी ने किया।
केंद्रीय ऊर्जा एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर द्वारा उद्योगपतियों से जो कहा गया उनके कथन से मैं भी पूरी तरह सहमत हूं। देश के स्वर्णिम विकास और उद्योंगों की प्रगति की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को ऐसी सोच विकसित करनी होगी तभी हम रामराज्य की परिकल्पना जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कभी देखी होगी और पूर्व पीएम स्व.. राजीव गांधी ने भी दिखाई दी और अब हमारे वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं से जुड़ी है। वो तभी पूरी हो सकती है जब हर कोई लालच और आलस व नकारापन छोड़कर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ साथ जो काम उन्हें दिए गए हैं वो समय से उन्हें पूरा करें।
ऐसे तो नहीं हो पाएगी रामराज्य की परिकल्पना साकार