देश का इतिहास गवाह है कि कब आदमी के विचार बदल जाएंगे और कौन कब क्या कर बैठे यह कोई नहीं जानता। लेकिन यह बात भी पक्की है कि बिना सबूतों के किसी को किसी भी प्रकार से बदनाम करने का प्रयास चाहे कोई भी करें उसे भी सही नहीं कहा जा सकता। आजकल धर्म परिवर्तन के फायदे गिनाते तथा सरकारी आवास पर मंतारण की तकरीरों को लेकर कुछ खबरें पढ़ने को मिली। जिन्हें देखकर और पढ़कर यह लगा कि अगर छापने वाले थोड़ा विस्तार से इस संदर्भ में जांच पड़ताल कर तथ्यों के साथ खबर बनाते तो ज्यादा अच्छा था। क्योंकि कुछ दशक पूर्व दिल्ली से प्रकाशित नवभारत टाइम्स में एक महिला और उसकी बेठियों के संदर्भ में छपी खबर और फिर वो झूठी निकलने पर वरिष्ठ संवाददाता द्वारा व्यक्त किए गए शब्द कि क्या खबर छापने वाले अब मां बेटी का सम्मान वापस दिला सकते हैं को दृष्टिगत सोचा जाए तो मुझे लगता है कि यह समाचार पूर्ण नहीं है। फिलहाल हम बात कर रहे हैं 26 अगस्त 1985 बैच के आईएएस संवर्ग में शामिल हुए बिहार निवासी यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी इफ्तिखारुद्दीन की।
मैं ना तो किसी प्रकार के धर्म परिवर्तन का या सांप्रदायिक सोच का समर्थन नहीं करता हूं लेकिन पूरी तौर पर सांपद्रायिक सदभाव की सोच रखने वाले इफ्तिखारुद्दीन के संदर्भ में धर्म परिवर्तन को लेकर पढ़ने को मिले शब्द से आश्चर्य जरूर हुआ। पिछले कई दशक से उनसे मेरी कोई मुलाकात तो नहीं हुई लेकिन जब वो मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हुआ करते थे तो काफी मिलना जुलना होता था। और उस समय की एक घटना आज भी याद है कि दिल्ली रोड स्थित गौशाला का नक्शा पास होना था। उस समय के उसके पदाधिकारी बनवारी लाल हीरालाल फर्म के संचालक विनोद बंसल काफी परेशान घूम रहे थे क्योंकि जेई जो है हिंदू होने के बाद भी उन्हें परेशान कर रहा था और चर्चा थी कि वो इस एवज में कुछ चाहता था। लेकिन तभी विनोद बंसल एमडीए में नजर आए। उस समय उपाध्यक्ष के रूप में इफ्तिखारुद्दीन पार्क में जनता से मिल रहे थे। तब उनका परिचय मैंने विनोद बंसल से कराते हुए उन्हें बताया गया कि किस प्रकार गौशाला का नक्शा पास करने मेें परेशान किया जा रहा है। इस पर उन्होंने तुरंत विनोद बंसल को बैठाकर उनके लिए चाय मंगाई तथा जेई को बुलाकर जमकर गाय के महत्व के बारे में उसे समझाया और एक घंटे मंें नक्शा पास कराकर दे दिया गया। आज जब यह खबर पढ़ी तो थोड़ा आश्चर्य जरूर हुआ।
हां यह जरूर है कि अपने पद की गरिमा और न्यायसंगत कार्य करने के लिए उस समय चर्चित रहे इफ्तिखारुद्दीन थोड़ा गलत बात पर कड़वा बोलते थे जो लोगों को बुरा लगता था। हो सकता है कि इस खबर के पीछे भी कुछ ऐसा ही ना हो। क्योंकि 2014 से 22 अप्रैल 2017 तक तीन साल वो कानपुर के मंडलायुक्त एवं श्रम आयुक्त भी रहे। और उस समय की घटना की वीडियो आज चार साल बाद जारी की जा रही है आखिर जिन लोगों के पास यह थी उन्होंने तब उस पर ऐतराज क्यों नहीं उठाया।
कर्मचारी नेता भूपेश अवस्थी द्वारा इस संदर्भ में मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज की गई बताई जा रही है तो किसी भाजपा नेता ने इस प्रकरण की जांच कराने की मांग की है तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा जानकारी होने पर जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात की गई है जो ठीक भी है। अगर कहीं गलत हो रहा है तो कार्रवाई होनी ही चाहिए।
मगर सवाल यह उठता है कि कई मौकों पर कुछ छपास खोरों के हवाले से सोशल मीडिया पर तथ्य विहीन खबरें चलने के लिए मुंह मंे पानी भर भरकर अपने शब्दों और लेखन से इस आधुनिक मीडिया और इससे जुड़े लोगों को कोसने वाले लिख रहे हैं कि आईएएस अधिकारी के आपत्तिजनक कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और साथ में उनके द्वारा यह भी लिखा जा रहा है कि हम इन वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं। किसी ने सीधे सीधे यह भी नहीं लिखा है कि आईएएस अधिकारी किसी को धर्मातरंण के लिए उकसाते नजर आ रहे हैं। इनके द्वारा बताया जा रहा है कि देखने में एक सुसज्जित घर जो सरकारी आवास जैसा लग रहा है वहां एक वक्ता जमीन पर बैठे लोगों को संबोधित कर रहा है। वह कहता है कि अल्लाह ने उत्तर प्रदेश के तौर पर ऐसा संेटर दिया है जहां से पूरे देश में काम कर सकते हैं। उसके बाद इफ्तिखारुद्दीन इस्लाम में होने के फायदे गिनाते हैं लेकिन इन्होंने यह नहीं बताया कि वक्ता ने किस काम के फायदे गिनाएं। और देश दुनिया में क्या काम करने की बात हो रही थी। और रही बात इन लाइनों की कि ऐलान करो कि दुनिया में अल्लाह की बादशाहत पूरी दुनिया में कायम करनी है। ऐसे शब्द तो अपने अपने धर्म के बारे मेें लोग कहते सुने जाते हैं। रही बात पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की किताब का जिक्र किए जाने की तो ऐसा तो कई बार लोग चर्चा भी करते हैं और इसमें गलत क्या है। क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति की किताब की चर्चा है तो उन्होंने कुछ गलत को अपनी किताब में नहीं लिखा होगा।
वर्तमान में उप्र राज्य परिवहन निगम रोडवेज के चेयरमैन वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इफ्तिखारुद्दीन से जुड़े वीडियो की गहनता से जांच होनी चाहिए। सही हो तो दोषी जो भी उसके विरूद्ध सख्त कार्रवाई हो और अगर यह किसी प्रकार का षडयंत्र साबित हो तो इसके पीछे कौन लोग है और पांच साल बाद इस प्रकरण को उठाने के पीछे उनका मकसद क्या है इसकी भी जांच कराकर अगर खबर गलत है तो उसके लिए दोषियों को भी नहीं बख्शा जाना चाहिए। क्योंकि वर्तमान में आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, संघ प्रमुख मोहन भागवत जी और यूपी के यशस्वी सीएम योगी आदित्यनाथ जी सहित सत्ता संभाल रहे और प्रमुख जनप्रतिनिधि देश प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द भाईचारा व शांति स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और अल्पसंख्यकों को भाजपा के शासनकाल में पूर्ण निर्भिक वातावरण में सांस लेने और काम करने का माहौल स्थापित किया जा रहा है। मुस्लिम विद्वानों और जनप्रतिनिधियों को समयानुकुल हर जगह सम्मान भी देने में सरकार पीछे नहीं है और जो भी अल्पसंख्यक जिस क्षेत्र में सक्रिय है उसे वहीं शासन की नीति नियमों के अनुसार कार्य करने के लिए माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे में अगर यह आरोप किसी षडयंत्र का हिस्सा होते हैं तो उसे मजबूत हो रहे भाईचारे के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता।
मेरा मानना है कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को इस पूरे प्रकरण की दूध का दूध ओर पानी का पानी अलग करने की कहावत के तहत किसी योग्य प्रशासनिक अधिकारी या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच करानी चाहिए।
– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com